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हम जो देते है जिन्दगी में हमे वही वापिस मिलता है

हम जो देते है जिन्दगी में हमे वही वापिस मिलता है

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हम में से हर किसी के पास अपनी जिन्दगी है लेकिन फिर भी कुछ लोग होते है जो असल मायने में इसे जीते है या यूँ कहूँ एक संजीदा जिन्दगी जो दूसरों के लिए भी खुशियों के मायने बने ऐसी जिन्दगी जी पाना बहुत मुश्किल होता है क्योकि हम लगातार चीजों को ignore मारते चले जाते है जबकि ये एक सत्य है कि जितना हम दूसरो के लिए बेहतर बन पाते है उतना ही हम अपने लिए भी बेहतर होते है क्योकि जिन्दगी में हम उतना ही पाते है जितना किसी दूसरे को देने में हम समर्थ होते है | एक कहानी के जरिये आप इसे समझ सकते है | (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); ” एक दिन एक बच्चा अपनी माँ से नाराज हो जाता है तो जब उसे डांट दिया जाता है तो गुस्सा होकर वो घर से बाहर चला जाता है और घर से थोड़ी दूर एक पहाड़ी पर जाकर जोर से चिल्ला कर बार बार कहता है कि ” मैं तुमसे नफरत करता हूँ ” तो थोड़ी ही देर बाद उसे अपनी ही
आपके शब्द आपको असफलता दिला सकते है

आपके शब्द आपको असफलता दिला सकते है

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एक जुमला प्रचलित है कि ” मुंह से निकले शब्द वापिस नहीं लिए जा सकते ठीक वैसे ही जैसे धनुष से निकला हुआ तीर कभी वापिस नहीं आता ” इसलिए हमे बड़ी सावधानी से अपने शब्दों का चुनाव करना चाहिए बडबोलापन दोस्तों के बीच आपको जरूर लोकप्रियता दिला सकता है लेकिन कभी कभी ये नुकसानदेह होता है क्योकि पहली दफा हमसे मिलने के बाद जो छवि किसी इन्सान के लिए बनती है उसमे उस से हुई हमारी बातचीत का ही शत प्रतिशत योगदान होता है उसके बाद बाकि सारी चीजों का नंबर आता है | हम एक कहानी के जरिये इसे समझते है (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); एक आदमी ने अपने पडोसी को बहुत बुरा भला कहा जबकि बाद में उसे अपनी गलती का अहसास हुआ तो वो पश्चाताप करने चर्च गया वंहा जाकर पादरी के सामने ये कॉन्फेशन दिया तो पादरी ने उस से एक पंखो से भरा थैला दिया और उस से कहा कि जाकर किसी खुली जगह में बिखेर तो तो पा
एक फ़कीर और सिकंदर का राज्य

एक फ़कीर और सिकंदर का राज्य

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सिकंदर जब भारत लौटा तो एक फ़कीर से मिलने गया तो सिकंदर को आते देख फ़कीर हंसने लगा इस पर सिकंदर ने ने मन में किया कि ये तो मेरा अपमान है और फ़कीर से कहा “या तो तुम मुझे जानते नहीं हो या फिर तुम्हारी मौत आई है ” जानते हो मैं कौन हूँ | मैं हूँ सिकंदर महान | (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); इस पर फ़कीर और भी जोर जोर से हंसने लगा |उसने सिकंदर से कहा मुझे तो तुम में कोई महानता नजर नहीं आती मैं तो तुम्हे बड़ा दीन और दरिद्र देखता हूँ तो सिकंदर ने उस से कहा तुम पागल हो गये हो मैंने पूरी दुनिया को जीत लिया है तो इस पर उस फ़कीर ने कहा ऐसा कुछ नहीं है तुम अभी भी साधारण ही हो फिर भी तुम कहते तो मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ कि मान लो तुम किसी रेगिस्तान मे फंस गये और दूर दूर तक तुम्हारे आस पास कोई पानी का स्त्रोत नहीं है और कोई भी हरियाली नहीं है जन्हा तुम पानी खोज सको तो